नारियल में भी होते है ये गुण इसलिए मंदिर में चढ़ाया जाता है ?

नमस्कार दोस्तो आज हम आपके लिए लाए फल की जानकारी कोई ऐसा वैसा फल नही बल्कि जिसमे कुछ दैवी गुण जो आम फलो में नही होते जो सिर्फ श्रीफल में ही होते है 
नारियल को सर्वाधिक शुभ फल माना जाता है, इसी कारण इसका एक नाम 'श्रीफल' है। नारियल में शिव, गणपति, श्रीराम व श्रीकृष्ण- इन पाँच देवताओं की दैविक तरंगों को अपनी ओर आकृष्ट करने और उन्हें आवश्यकतानुसार प्रक्षेपित करने की क्षमता है। इसे सर्वाधिक सात्तिविकता प्रदान करनेवाला फल कहा गया है। नारियल के द्वारा हम अनिष्ट शक्तियों के कष्ट दूर कर सकते हैं। इसके द्वारा बुरी नजर भी उतारते हैं, क्योंकि नारियल में अनिष्टकारी तरंगों को खींचने की क्षमता है। अनिष्ट शक्ति से पीड़ित व्यक्ति के कष्ट दूर करने के लिए नारियल से उसकी नजर उतारी जाती है। इसी प्रकार जब हम मंदिर में या किसी अन्य अवसर पर नारियल फोड़ते हैं, तो उस समय उसमें से मारक मंत्र 'ॐ फट' जैसी ध्वनि निकलती है, जिससे अनिष्ट शक्तियाँ दूर भाग जाती हैं। एक मत के अनुसार मानव खोपड़ी के सदृश्य 'नारियल' की रचना ब्रह्मर्षि विश्वामित्र ने लोक-कल्याण के लिए अपने संकल्प से की थी। जब हम नारियल किसी देव को अर्पित करते हैं तो हमारा यह कृत्य एक प्रकार से अपना मस्तक ही अरपण करने के समान होता है। इसी उददेश्य को ध्यान में रखते हुए ऋषिवर विश्वामित्र ने इस फल की उत्प्पति की थी। जिस प्रकार हमारे शरीर में तीन आँखें होती हैं (तीसरी आँख जो बाहय रूप से नहीं दिखती, पर अदृश्य रूप में हमारे मस्तिष्क में होती है) वैसे ही नारियल में भी तीन आँखें होती हैं। और इसमें अंदर भरा जल हमारे सिर में विद्यमान रक्त के समान होता है। नारियल देवालयों में चढ़ाने के पीछे विज्ञान यही है कि जब हम किसी मंदिर में किसी देवी या देवता को नारियल चढ़ाते हैं तो एक प्रकार से हम अपना सिर, अपना अहंकार, अपना अस्तित्व इस नारियल के रूप में अर्पण करते हैं और बदले में सुबुद्धिवाला मस्तक माँगते हैं।
नारियल अर्पण करते समय उसका आँखवाला भाग देवता की तरफ होना चाहिए, जिसका विज्ञान यह है कि आँखवाली ओर से ही नारियल देवशक्ति ग्रहण करता है और हमें प्रदान करता है। इसी प्रकार नारियल फोड़ते समय 'फट' की जो आवाज आती है, वह मंत्र के समान शक्तिशाली होती है,जिससे अनिष्ट शक्तियाँ दूर रहती हैं और हमारे आस-पास के वातावरण को निर्मल रखती हैं। इसके अतिरिक्त नारियल के पानी को गंगाजल और गौमूत्र के समान शुद्ध एवं पवित्र माना गया है। इस कारण फोड़े गए नारियल के जल को प्रवेश द्वार के दोनों ओर या जिस स्थल पर पूजा हो रही है, उस स्थान पर चढ़ाया जाता है, ताकि उस जगह की शुद्धि हो जाए । इसके उपरांत नारियल की गरी प्रसाद रूप में सबको बाँटी जाती है। गरी ग्रहण करने से सभी को दैविक आशी्वाद प्राप्त होता है। इन्हीं कारणों से नारियल चढ़ाने और नारियल फोड़ने की प्रथा हमारे सनातन कर्मकांड में सम्मिलित है। ओर इसके विपरीत नारियल के बहुत सारे फायदे भी है जैसे इससे शरीर बलवाल बनाता है मस्तिष्क तेज बनाता है और ऐसा भी माना जाता है जब हमारे शरीर मे प्लाज़मा की जगह डॉक्टर नारियल पानी को हमारी शरीर मे प्रवाहित कर सकते है 

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