नही लगाना चाहिए इन चीजों का बंदनवार घर मे होगी कलह ?

पूजा-पाठ व अन्य शुभ अवसरों पर आपने प्रायः वहाँ फूल-पत्तों की बंदनवार लगी देखी होगी। महानगरों में तो विवाह आदि के अवसर पर हजारों रुपयों के फूल सजाए व लगाए जाते हैं। प्रकृति का अंग होने के कारण जब तक फूल-पत्तियाँ ताजा रहती हैं, उनमें वातावरण से मनुष्य के लिए अनुकूल तरंगें खींचने की क्षमता होती है। इसी प्रकार जब हम पूजा करते हैं, तब पूजित देवताओं की सुक्ष्म -लहरियों को भी खींचिकर उन्हें वातावरण में प्रक्षेपित करने की क्षमता फूल व पत्तों में होती है। इस कारण प्रवेश द्वार पर फूल-पत्तों का बंदनवार लगाया जाता है। यही इन फूल- पत्तियों का विज्ञान है। बड़ी-बड़ी कोठियों और फार्म हाउस आदि में जो उपवन बनाए जाते हैं, उनका भी यही लाभ होता है। बंदनवार में लगे फूलों से प्रक्षेपित गंध-लहरियाँ देवताओं का स्वागत करती हैं, जिससे देवता प्रसन्न होते हैं, जिससे उनकी सात्त्विकता का हमें लाभ प्राप्त होता है। आम के पत्तों में आन्य वृक्षों के पत्तों की अपेक्षा देवताओं की लहरियों को खींचने तथा प्रक्षेपित करने की क्षमता अधिक होती है। इस कारण बंदनवार में आम के पत्तों का प्रयोग होता है। गेंदे के फूल अधिक समय के लिए ताजा रहते हैं। इस दृष्टिे से उनका उपयोग भी प्रायः होता है। परंतु बंदनवार में लगे पत्ते व फूल स्वच्छ होने चाहिए, इसलिए उन्हें पहले स्वच्छ जल से धोकर व पोंछकर साफ करना चाहिए। बंदनवार लगाते समय उसके पत्तों की डंठल आगे की ओर होनी चाहिए। पत्तों की संख्या भी जगह की रचनानुसार होनी चाहिए। मुरझाए व अपवित्र फूल-पते प्लास्टिक के फूलों जैसे ही होते हैं, जिनमें दैविक सूक्ष्म-लहरियों को अपनी ओर खींचने की क्षमता नहीं होती। इसलिए बासी, मुरझाए व प्लास्टिक के फूल-पत्तियों का प्रयोग पूजा आदि में वर्जित है। वास्तुशास्त्र व 'फैंगशुई' के अनुसार भी घरों में प्लास्टिक के फूलों का लगाना वर्जित है।


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