भाषा जिससे मनुष्य मनुष्य से वार्तालाप करता है अपने विचारों का आदान प्रदान करता है अपने काम करता है वैसे तो दुनिया भर में विविध प्रकार की भाषाएँ है कुछ बहुत ही सरल है कुछ बहुत ही कठिन उन्ही में से एक भाषा है वैसे मान्यत है के शब्दब्रम्ह के अनुसार संसार में जितनी भी सूक्ष्म व स्थूल वस्तुएँ हैं, वे सब ध्वनि से ही उत्पन्न हुई हैं। योग सूत्रं का यह मानना है कि इस संसार में पचास मूल ध्वनियाँ हैं, शेष ध्वनियाँ इन्हीं पचास मूल ध्वनियों से निकली हैं। मूल ध्वनियों को मात्रिक कहते हैं। इन मात्रिकाओं को ऋषि-मुनियों ने अपनी ध्यानावस्था में सुना और फिर वाक्-तत्व् (Phonetic Principle) के आधार पर एक भाषा का निर्माण किया, जिसे उनहोंने 'संस्कृत' (अतिशोधित) नाम दिया। संस्कृत एक ऐसी भाषा है जिसमें मनुष्य के कंठ, दंत, जिह्वा, ओष्ठ व तालू से निकलनेवाली सभी ध्वनियों को ज्यों का त्यों शब्दों में लिखा जा सकता है। विश्व की अन्य किसी और भाषा में ऐसा करना संभव नहीं है। संस्कृत भाषा में ५१ वर्ण हैं जिन्हें ब्राहमी लिपि में लिखा जाता है। अन्य भाषाओं की अपेक्षा संस्कृत में यह क्षमता है कि इसमें जैसा बोला जाता है, वैसा ही उसे लिखा जाता है। यह क्षमता इस भाषा की वैज्ञानिक आधार पर बनी वर्णमाला कारण जब कोई संस्कृत का शुद्ध उच्चारण करता है तो उस मनुष्य के शरीर पर एक अनुकूल प्रभाव पड़ता है। यही
नहीं, जो इस भाषा के शुद्ध उच्चारण को सुनते हैं, उन पर भी इसका प्रभाव पड़ता है। यही कारण है कि पुराणों में लिखा है कि जो व्यक्ति वेद-पुराणों, रामायण व गीता के मूल पाठों का श्रवण करता था, उसका भी कल्याण हो जाता था। शायद यही कारण था कि पाश्चात्य गायिका 'मैडम मडोना' ने संस्कृत के उच्चारण को सीखने के लिए एक अल्प आवधि कोर्स बनारस में किया। मडोना का कहना था कि इस भाषा के शुद्ध उच्चारण को सीखने के बाद उसने ऐसा महसूस किया कि संस्कृत शिक्षण के बाद उसे सुननेवाले अधिक प्रभावित हुए। खेद है कि आज संस्कृत एक जीवित भाषा नहीं है। गुप्तकाल के दौरान संस्कृत समस्त भारत की राष्ट्रीय भाषा थी, पर कालांतर में इसका लोप हो गया । एक सर्वे के अनुसार, देश में संस्कृत बोलने व समझनेवाले मात्र छह-सात हजार ही लोग हैं। संस्कृत भाषा को जीवित बनाने के लिए जर्मनी में कई शोध हुए हैं। पर आज आवश्यकता इस बात की है कि ऐसे शोध भारत में भी होने चाहिए । संस्कृत संबंधी एक आश्चर्यजनक बात यह है कि अमेरिका में रह रहे भारतीयों ने न्यू जर्सी शहर में संस्कृत की एक संस्था खोली है और वे वहाँ संस्कृत सीखते-सिखाते हैं संस्कृत एक हिंद-आर्य भाषा है जो हिंद-यूरोपीय भाषा परिवार की एक शाखा है। आधुनिक भारतीय भाषाएँ जैसे, हिंदी, बांग्ला, मराठी, सिन्धी, पंजाबी, नेपाली, आदि इसी से उत्पन्न हुई हैं। इन सभी भाषाओं में यूरोपीय बंजारों की रोमानी भाषा भी शामिल है
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