चातुर्मास्य का का चमत्कारी समय के उपयोग हो जाओगे सर्वगुणसंम्प्पन ?
वर्षाकाल के चार महीनों को चातुर्मास्य के नाम से जाना जाता है। इन चार महीनों में भगवान् विष्णु योगनिद्रा में शेषश…
वर्षाकाल के चार महीनों को चातुर्मास्य के नाम से जाना जाता है। इन चार महीनों में भगवान् विष्णु योगनिद्रा में शेषश…
मंत्रसाधना के लिए या नाम जप के लिए माला का प्रयोग लगभग सभी धर्मों में है। अंतर केवल इतना है कि माला के दाने अलग-…
पुनर्जन्म सनातन चिंतन का एक महत्त्वपूर्ण अंग है। इस जन्म में हम जो एक दूसरे से संबंध स्थापित करते हैं, वे हमें आ…
सोमंडल के समस्त ग्रह सूर्य के चारों ओर ३६० डिग्री के वृत्ताकार में परिक्रमा करते हैं। सौरमंडल के इस वृत्ताकार को…
पान-किसी भी सनातन पूजा-पाठ में पान-सूुपारी उसके अभिन्न अंग हैं। इन दोनों पदार्थों में अपने-अपने विशिष्ट गुण हैं,…
प्रकृति अर्थात् वनस्पति का हमारे धर्म में प्राचीन काल से अटुट संबंध रहा है। सच तो यह है कि सनातन धर्म की जड़े प्…
विवाह किसी भी स्त्री- पुरुष के जीवन का एक महत्त्वपूर्ण कदम है, अतः इसे उठाते समय हमें खूब सोच- विचारकर उठाना चाह…
पापल सदियों से हमारी संस्कृति का एक महतवपूर्ण और अभिन्न अंग रहा है। इसीलिए भारत का सर्वोंत्तम पुरस्कार 'भारत…
सनातन शिष्टाचार में एक नियम यह है कि हमें किसी की निंदा नहीं करनी चाहिए। इस मान्यता के पीछे "शब्द- विज्ञान&…
किसी भी शुभ अवसर पर घर-आँगन में रंगोली सजाने की बड़ी प्राचीन प्था रही है। रंगोली सजाने के पीछे पृथ्वी-तत्त्व से …
पूजा-पाठ व अन्य शुभ अवसरों पर आपने प्रायः वहाँ फूल-पत्तों की बंदनवार लगी देखी होगी। महानगरों में तो विवाह आदि के…
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